क्या गुजरात चुनाव वाला प्रयोग और पर्दे के पीछे वाले रणनीतिकार 2024 चुनाव के मद्देनजर देश में भाजपा को काम आएंगे ??

Jan 3, 2023 - 19:37
Jan 3, 2023 - 19:43
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क्या गुजरात चुनाव वाला प्रयोग और पर्दे के पीछे वाले रणनीतिकार 2024 चुनाव के मद्देनजर  देश में भाजपा को काम आएंगे ??
क्या गुजरात चुनाव वाला प्रयोग और पर्दे के पीछे वाले रणनीतिकार 2024 चुनाव के मद्देनजर में देश में भाजपा को काम आएंगे ??

भाजपा को वर्ष 2024 के सबसे बड़े चुनाव में अगर जनता की ‘चॉइस’ बनना है तो उसके लिए रणनीति और रणनीतिकार दोनों की ही जरूरत होगी – यहाँ पर स्पष्टता कर दे की रणनीतिकार से यहाँ पर मतलब है – ‘एक मजबूत राष्ट्रीय अध्यक्ष’.


राष्ट्रीय अध्यक्ष जो पूरी ही पार्टी को एक सूत्र में ला सके  - अब वैसे तो भाजपा के विरोधी पार्टी वाले कहते है की भाजपा को दो ही लोग चलाते है – नरेंद्र मोदी और अमित शाह. लेकिन अगर विरोधी पार्टीओं की इस बात को एक अलग दिशा में रखकर यह सोचे की – नरेंद्र मोदी जो की देश के प्रधानमंत्री है, अमित शाह जो की देश के गृहमंत्री है – यानिकी दोनों सन्माननीय होदे पर है. जिसकी वजह से ‘आम राजनेता’ जितना समय उनके पास नहीं हो सकता – ‘राष्ट्र प्रथम है – पार्टी बाद में’


अब यह एक छोटी सी प्रस्तावना थी – लेकिन अगर अब मुद्दे पर आए – तो आपको बता दें की जे.पी.नड्डा जो की अभी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष है. लेकिन जेपी नड्डा का 3 साल का कार्यकाल 20 जनवरी 2023 को समाप्त हो रहा है.
अब वैसे तो कुछ बातें पहले यह भी सामने आ रही थी की नड्डा का कार्यकाल बढ़ सकता है, लेकिन ‘हिमाचल प्रदेश’ जो की जे.पी.नड्डा का गढ़ कहा जा सकता है. वहीं हिमाचल प्रदेश में भाजपा को 2022 के अंत में हुए चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. जिससे अब नड्डा के कार्यकाल को बढाने की बात अभी तो मुमकिन नहीं लग रही.


अब हिमाचल प्रदेश की हार को भूलकर भाजपा ने जिस तरह से गुजरात चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतने के रिकोर्ड पर जश्न मनाया. उसी पर से अब अगर गुजरात पर, गुजरात चुनाव परिणाम पर आए तो प्रस्तावना में जो अद्रश्य प्रश्न था उसका उत्तर गुजरात परिणाम के जश्न की वजह में मिल जाता है. सीधा मतलब है गुजरात भाजपा अध्यक्ष सी.आर.पाटिल.
गुजरात में विधानसभा की 182 सीटें है. अब 2022 के चुनाव में 182 में से 182 सीटें जीतने का लक्ष्य देने का काम सी.आर.पाटिल ने किया. यानिकी गुजरात भाजपा के सभी 182 सीटों के विस्तार के बड़े से बड़े नेता हो या छोटे से छोटा कार्यकर्त्ता उस पर यह दबाव आ गया की अगर 182 सीटों के लक्ष्य में – 182 सीटों के दावे में अगर हमारे विस्तार में भूल से भी भाजपा को हार मिली तो क्या होगा ?? 
वैसे तो दबाव कोंग्रेस पार्टी पर सबसे ज्यादा बना क्यूंकि एक तरफ कई बड़े नेता, कार्यकर्ता भाजपा में शामिल होते गए और यहाँ लगातार भाजपा द्वारा बड़ी जीत का दावा, तो कहीं न कहीं आम आदमी पार्टी के चुनाव लड़ने से सत्ता विरोधी मतों के विभाजन का डर - जो की सही भी साबित हुआ.
अब कोंग्रेस को लगता ही था की भाजपा और आम आदमी पार्टी A और B टीम है – लेकिन जो भी सत्य या असत्य हो लेकिन भाजपा को फायदा तो हुआ.
भाजपा की राजनीति का केंद्र ‘कोंग्रेस मुक्त’ रहा है – जिसे गुजरात में हासिल करने में काफी हद तक भाजपा को सफलता मिली. 
अब पन्ना प्रमुख की रणनीति याद करें, जो भी सी.आर.पाटिल ही लाए – जिसकी वजह से भाजपा ‘गुजरात’ जो की गढ़ था ही लेकिन उसे और मजबूती मिली तो साथ ही ‘गुजरात मोडल’ जिसकी बदौलत भाजपा केंद्र में है – वह मोडल की लाज बच गई और बढ़ गई.
यानिकी सी.आर.पाटिल भाजपा की गुजरात में भव्य जीत के पीछे के रणनीतिकार साबित हुए.
अब बड़ी ही सीधी बात है की 2024 के बड़े चुनाव से पहले कई राज्यों में चुनाव होंगे, जो कहीं न कहीं 2024 की खुर्शी की नींव बन सकते है – जो भी राजनीतिक पार्टी उन राज्यों में उनका परचम लहरा पाए.
गुजरात भाजपा की प्रयोगशाला है – उसे अगर सही माने तो जो प्रयोग सफल साबित हुआ, जो राजनीतिक प्रयोग के पीछे सी.आर.पाटिल की महेनत थी, तो उस प्रयोग को अन्य राज्यों के चुनाव और 2024 में वह प्रयोग को बढ़ाने में सी.आर.पाटिल ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर सामने आ सकते है - इस शक्यता को नकारा नहीं जा सकता.
अब हाल ही में गुजरात में सी.आर.पाटिल ने भी कुछ कह दिया है की – “मैं रहूँ या न रहूँ – डेटा बैंक का इस्तेमाल होना चाहिए.” यहाँ तक की २०२४ के चुनाव के मद्देनजर भी चर्चा हुई.
जिन शब्दों को समजे तो शायद अभी भले ही भाजपा का हाईकमान न बताए पर दिल्ली में होने वाली मीटिंग में कौन नया अध्यक्ष होगा वह फैसला शायद ज्यादातर क्लियर हो चुका है. 


गुजरात में विजय रूपाणी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद  2017 के चुनाव में सबसे अधिक मतों से जीतने वाले भूपेन्द्र पटेल को अगर मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है तो फिर 2022 के गुजरात चुनाव में सबसे अधिक सीटों से चुनाव जीताने में पर्दे के पीछे के रणनीतिकार सी.आर.पाटिल को राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बन सकते क्या ???

 

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